Sunday, 24 September 2017

तेरी डोली उठी
मेरी मयत उठी
फूल तुझ पर भी बरसे
फूल मुझ पर भी बरसे
फ़र्क़ सिर्फ इतना सा था
तू सज गयी
मुझे सजाया गया
तू भी घर को चली
में भी घर को चला
फ़र्क़ सिर्फ इतना सा था
तू उठ के गयी
मुझे उठाया गया
महफ़िल वहा भी थी
लोग यहा भी थे
फ़र्क़ सिर्फ इतना सा था
उनका हँसना वहा
इनका रोना यहा
काजी उधर भी था
मोलवी इधर भी था
दो बोल तेरे पढ़े , दो बोल मेरे पढ़े
तेरा निकाह पढ़ा , मेरा जनाजा पढ़ा
फ़र्क़ सिर्फ इतना सा था
तुझे अपनाया गया
मुझे दफनाया गया
#

No comments:

Post a Comment

Unity Of power ( ekta mein shakti hain )